दुनिया कैसे भारत बन गया सॉफ्टवेर निर्यात में एक बड़ा खिलाडी ?



कुछ दशक पहले भारत को पश्चिमी देश कोई खास तवज्जह नहीं देते थे, उसे सिर्फ खेतीबाड़ी करने वाला एक बड़ा सा मुल्क समझा जाता था, जिसके कन्धोपर बढ़ते हुए जनसँख्या का बोझ है. 

राजीव गाँधी का सपना ..

भूतपूर्व प्रधान मंत्री राजीव गाँधी जी ने युवाओ के हाथो में कंप्यूटर पहुचाने का सपना देखा था… चूँकि भारत का बहुसंख्य तबका नौजवानों का है तो जरुरी है के इन नौजवानों का इस्तेमाल देश के भले के लिए हो.. और देश का भला भी इन नौजवानों के भला करने में ही है.

मुश्किल दौर ..

और वह दौर भारत ने देखा जब इसरो के राकेट बैलगाड़ी और साइकलपर लादकर प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया जाते थे. इसी दौरान तकनिकी पढाई का ढांचा देश में मजबूत करने का सिसिला शुरू हुआ. और कई लोगो ने शिक्षण संस्थाओ को कमाई का विकल्प समजा , और वह लोग इस में कूद पड़े. मुंबई, हैदराबाद , पूना और दिल्ली में तकनिकी पढाई देने वाले कॉलेज खुले ,  लेकिन मंजिल अब भी दूर थी .

सुधरती अर्थव्यवस्था ..

जैसे जैसे इस देश की अर्थ व्यवस्था पटरीपर आने लगी लोगो के पास इंजिनीरिंग जैसे तकनिकी पढाई करने की कुव्वत आते गयी.  और सन २००० से २००५ के दौरान बहुत सारे इंजीनियरिंग कॉलेज खुले और कंप्यूटर एव सॉफ्टवेर के अनगिनत कोर्स शुरू हो गए. जिसे देखो वह इंजीनियरिंग करना चाहता था इनमे अक्सर तबका कंप्यूटर सॉफ्टवेर इंजिनियर बन गया.  इनफ़ोसिस , विप्रो जैसी कंपनिया बड़े पैमाने पर बाहर देश सॉफ्टवेर निर्यात करने लग गई.
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सस्ते में बनने लग गए सॉफ्टवेर..

चूँकि पढ़े लिखे सॉफ्टवेर इंजिनियर की तादाद बहुत ज्यादा हो गयी  और इसी वजह से वह बहुत कम वेतन पर काम करने लग गए , दुनिया के विकसित देशो के मुकाबले में भारत में कम लागत में अच्छे सॉफ्टवेर बनने लगे. सस्ते में काम होता है इस लिए तक़रीबन सभी विकसित देश अपने काम और सॉफ्टवेर भारत से आउटसोर्स करने लगे .
इसी दौरान कई ऐसे नौजवान जो खुद कुछ करना चाहते थे , उन्होंने अपनी खुदकी सॉफ्टवेर कंपनिया खोल दी.ऐसी कई कंपनिया आज कामयाबियो के आसमान को छु रही है .
इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की क्रांति सारे दुनियामे आम हो गयी. और हर जगह सॉफ्टवेर और सुविधा की सख्त जरूरत पेश आने लग गयी, जिसे पश्चिमी देश पूरी नहीं कर सकते . इसी जरुरत को पूरा करते हुए आज भारत सॉफ्टवेर जगत का बड़ा खिलाडी बनकर उभरा है .

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