अगस्त 2022 की तेज़ गर्मी।
सऊदी अरब के रियाध के पास पहाड़।
चारों तरफ़ सन्नाटा, पत्थर और जलता सूरज।
इन्हीं पहाड़ों में एक सूडानी नागरिक अकेला खड़ा था —
पानी खत्म हो चुका था, मोबाइल सिग्नल नहीं था,
और दोस्तों से बिछड़े हुए कई घंटे बीत चुके थे।
यह कहानी नौकरी या सैर-सपाटे की नहीं है,
यह कहानी उस पल की है
जब इंसान को पहली बार एहसास होता है कि
अब सब कुछ उसके बस में नहीं रहा।
वह सऊदी अरब में काम करने वाले लाखों प्रवासियों में से एक था।
हर महीने मेहनत की कमाई घर भेजने वाला,
और महीनों बाद दोस्तों के साथ
थोड़ी राहत के लिए पहाड़ों की सैर पर निकला था।
लेकिन सऊदी अरब के पहाड़ सुंदर होने के साथ-साथ निर्दयी भी हैं।
रेगिस्तान और चट्टानों के बीच
रास्ता भटकना यहाँ मौत से बातचीत जैसा होता है।
किस वजह से वह दोस्तों से अलग हुआ,
इसका कोई साफ़ जवाब कभी नहीं मिला।
माना गया कि मोबाइल मैप्स की जानकारी न होना
और नेटवर्क खत्म हो जाना
उसके खो जाने की सबसे बड़ी वजह बनी।
समय बीतता गया।
प्यास बढ़ती गई।
शरीर जवाब देने लगा।
दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं,
सिर्फ़ सूरज और सूखी ज़मीन।
इस घटना की खबर तब सामने आई
जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ।
वीडियो में रेस्क्यू टीम
एक लगभग बेहोश इंसान को ढूंढती हुई दिखाई दे रही थी।
उसकी हालत देखकर यह साफ़ था —
अगर थोड़ी और देर हो जाती,
तो शायद कहानी यहीं खत्म हो जाती।
दोस्तों और परिवार ने
उसके देर तक वापस न लौटने पर
पुलिस और रेस्क्यू टीम से संपर्क किया।
इसके बाद शुरू हुआ एक लंबा और मुश्किल खोज अभियान।
24 घंटे बाद
वस्सेम वॉलंटियर रेस्क्यू टीम ने
उसे पहाड़ों के बीच ढूंढ निकाला।
टीम के सदस्यों के अनुसार,
जब वे उसे मिले
तो वह अपनी आख़िरी साँसों से लड़ रहा था।
पूरी तरह होश में नहीं था,
आँखें सूनी थीं, शरीर निर्जीव-सा।
सबसे पहले उसे पानी पिलाया गया।
धीरे-धीरे होश लौटा।
फिर सपोर्ट किट की मदद से
उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
रेस्क्यू टीम ने सिर्फ़ एक इंसान नहीं बचाया,
बल्कि एक परिवार की पूरी दुनिया बचाई।
इस टीम ने अब तक
120 से ज़्यादा लोगों की जान बचाई है —
ऐसे लोग जो पहाड़ों, रेगिस्तानों और
सिग्नल से दूर इलाकों में खो गए थे।
यह कहानी सिर्फ़ एक घटना नहीं है।
यह चेतावनी है।
सऊदी अरब जैसे देशों में
प्रकृति सुंदर ज़रूर है,
लेकिन ज़रा-सी लापरवाही
ज़िंदगी और मौत के बीच खड़ा कर देती है।
दूरदराज़ इलाकों में जाने से पहले
अपने परिवार को जानकारी देना,
नेटवर्क वाले रास्ते चुनना
और अकेले न निकलना
सिर्फ़ सलाह नहीं, ज़रूरत है।
कभी-कभी
एक गिलास पानी और सही समय पर मिली मदद
पूरी ज़िंदगी लौटा देती है।
और यह कहानी
उसी एक गिलास पानी की है।




