निमोनिया की सम्पूर्ण जानकारी- कारण, लक्षण और उपचार

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साल 2020 से पहले निमोनिया केवल बच्चों या कमजोर इम्यून सिस्टम वालों के लिए खतरा माना जाता था. लेकिन कोरोना वायरस के रूप में आये पैनडेमिक नें पूरी दुनिया को निमोनिया के बारे में दुबारा विचार करने पर मजबूर कर दिया. आज इस आर्टिकल के जरिये हम आपको निमोनिया से जुड़े जरुरी पहलुयों को बताना चाहते हैं ताकि आप इसके लक्षणों को नज़रंदाज़  ना करें क्यूंकि इलाज़ जितनी जल्दी होगा खतरा उतना कम होगा.

1 निमोनिया (Pneumonia) क्या है?

निमोनिया (Pneumonia) क्या है?
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हमारे पूरे शरीर को चलाने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, बिना इस प्राणवायु के जीवन का होना संभव नहीं है. हमारे शरीर में ऑक्सीजन का सारा लेन-देन हमारे फेफड़ों से होता है. फेफड़ों में मौजूद एल्विओलाय (Alveoli) ब्लड को ऑक्सीजन देकर ब्लड से कार्बन डाइऑक्साइड निकालते हैं तो साँस के जरिये बाहर निकलती है. अगर फेफड़ों में किसी भी प्रकार का संक्रमण या इन्फ्लेमेशन (Inflammation) होता है तो इन एल्विओलाय (Alveoli) में तरल पदार्थ जमा हो जाता है और सुजन आ जाती है जिसके कारण oxygen एक्सचेंज में कमी आ जाती है. इससे धीरे-धीरे बॉडी फंक्शन स्लो हो जाते हैं और अंततः ऑर्गन फेलियर से मौत भी हो सकती है.

2 निमोनिया के कारण

निमोनिया के कई कारण हो सकते हैं हर वो चीज़ जो फेफड़ों में इन्फ्लेमेशन (Inflammation) कर सकती है वो निमोनिया का कारण बन सकती है.

१ – संक्रमण

बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, पैरासाइट या माइकोप्लाज्मा इन सभी के संक्रमण से निमोनिया हो सकता है.

बैक्टीरिया– बैक्टीरियल निमोनिया मुख्य तौर पर स्ट्रेपटोकोकस निमोनी (Stretprococccus pneumonaie), माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma), या स्टेफाइलोकोकस (Staphylococcus) के कारण होता है. बैक्टीरियल निमोनिया ज्यादातर छोटे बच्चों में या 65 वर्षों से ऊपर के बुजुर्गों में होता है. लेकिन अगर आपकी सर्जरी हुयी है या आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है या आप धुम्रपान या शराब का सेवन करते हैं तब भी बैक्टीरियल निमोनिया का रिस्क बना रहता है.

वायरस– आमतौर वायरल निमोनिया इन्फ्लुएंजा ग्रुप के वायरस से होता था लेकिन कोरोना वायरस के आने के साथ इस लिस्ट में सबसे ऊपर कोविड-19 का नाम आ गया है. ये सभी वायरस हवा के जरिये फैलते हैं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में इनके इन्फेक्शन से सही इलाज़ ना मिलने पर जान तक जा सकती है.

फंगल निमोनिया– यूँ तो हमारे आस-पास के वातावरण में कई तरह के फंगल स्पोर्स मौजूद रहते हैं लेकिन आमतौर ये हमें नुक्सान नहीं पहुँचाते लेकिन जब आपकी  इम्युनिटी या आप किसी और बीमारी के कारण पहले से कमजोर होते है तो ये एक जटिल निमोनिया का रूप ले लेते है. जैसे म्युकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस, कैंडिडा यानी वाइट फंगस और एस्परजिलोसिस (Aspergillosis).

पैरासाइट– कई परजीवी जैसे लंग वर्म (lung worm) भी परसिटिक निमोनिया कर सकते.  साफ़-सफाई की कमी वाली जगहों पर ये संक्रमण ज्यादा देखने को मिलता है.

२ – एस्पिरेशन निमोनिया (Aspiration pneumonia)

अगर कोई तरल पदार्थ या खाने के कण फेफड़ों में चले जायें तो उसे एस्पिरेशन निमोनिया के नाम से जाना जात है. अगर आप कोई तरल पदार्थ पीकर तुरंत लेट जायें या कभी आपको लेटते हुए उल्टी आ जाये तब ये समस्या आती है. ये आमतौर पर बच्चों  में या पहले से बीमार लोगों में देखने को मिलता है.

३ – एलर्जिक निमोनिया

अगर आपको धुल, मिट्टी या रेत के कनों से एलर्जी है और ये सांस के रास्ते आपके फेफड़ों तक पहुँच जाते हैं तो आपको एलर्जिक निमोनिया हो सकता है.

3 निमोनिया के लक्षण

निमोनिया के लक्षणों को पहचान कर तुरंत इलाज़ शुरू करना बहुत जरुरी है. इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हैं:-

  • बलगम वाली खांसी
  • तेज़ बुखार
  • सांस लेने में तकलीफ
  • सीने में दर्द
  • भूख की कमी
  • थकान और कमजोरी
  • मन खराब होना या उल्टी आना
  • ब्लड प्रेशर का कम होना.
  • शरीर में ऑक्सीजन कंसंट्रेशन का कम होना.

4 निमोनिया का इलाज़ 

निमोनिया का इलाज़ 
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निमोनिया का इलाज़ बिमारी की गंभीरता, पेशेंट की उम्र और इम्युनिटी लेवल को ध्यान में रख कर किया जाता है. निमोनिया की गंभीरता का पता लगाने के लिए चेस्ट ऐक्स-रे और सिटी- स्कैन किया जाता है. अगर आपके फेफड़ों में 30% से ज्यादा डैमेज है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें. उससे कम डैमेज वाले पेशेंट घर पर ही आयुर्वेदिक और एलोपैथिक तरीके से अपना इलाज़ कर सकते हैं.

एलोपैथिक मेडिसिन से इलाज / उपचार

एंटीबायोटिक्स– ये दवाएं ज्यादतर बैक्टीरियल निमोनिया में काम आती है साथ ही वायरल निमोनिया में इसे सेकेंडरी इन्फेक्शन को रोकने के लिए दिया जाता है. आमतौर पर इस्तेमाल होनी वाली एंटीबायोटिक्स है, Azithromycin, Cefotaxime और Amoxicillin.

कफ सिरप– खांसी का कारण फेफड़ों में जमा बलगम और तरल पदार्थ होता है. खांसी की दवायें इस बलगम को नमी देती है ताकि ये बाहर निकल सके. जितनी जल्दी ये बलगम निकलेगा आपके फेफड़ों में उतना कम डैमेज होगा.

बुखार और एंटी-एलर्जिक दवाएं- निमोनिया का मुख्य कारण है इन्फ्लेमेशन (Inflammation) इसे कम करने के लिए आप एंटी-एलर्जिक दवाएं जैसे Monteleukast और Faxofenadine का इस्तेमाल किया जाता है. अगर बुखार 100 डिग्री से ऊपर है तो आप पेरासिटामोल(paracetamol) ले सकते हैं.

*किसी भी दवा को लेने से पहले आपकी उम्र और वजन के हिसाब से उसका डोज कैलकुलेट करना बहुत जरुरी है.

भाप लें- भाप लेने से छाती में गर्माहट आती है जिससे ब्लड सर्कुलेशन तेज़ होता है साथ ही बलगम भी जल्दी बाहर निकलता है. जिससे खाँसी और इन्फ्लेमेशन में राहत मिलती है.

निमोनिया का आयुर्वेदिक दवा से इलाज / उपचार

एलोपैथिक इलाज़ के साथ-साथ कई ऐसे आयुर्वेदिक नुस्खे हैं जिनसे आप घर में मौजूद चीज़ों से ही माइल्ड निमोनिया का उपचार कर सकते हैं और अपने शरीर की इम्युनिटी बढ़ा कर निमोनिया के कॉम्प्लीकेशन को कम कर सकते हैं.

हल्दी– हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (curcumin) इन्फ्लेमेशन को कम करता है और कफ नाशक के तौर पर जाना जाता है जिससे फेफड़ों का डैमेज रुकता है. आप 1/ 2 चम्मच हल्दी और ½ चम्मच काली मिर्च को 1 गिलास गुनगुने पानी के साथ दिन में 1 बार लें.

तुलसी– बाज़ार में आजकल कई तुलसी ड्रॉप्स उपलब्ध हैं जिन्हें चाय या गर्म पानी के साथ ले सकते हैं. तुलसी कफ और वात दोषों को दूर करके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढाती है और आपकी रोग से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है.

निमोनिया के दौरान रहन-सहन

  1. शराब, सिगरेट,तंबाकू छोड़ दें.
  2. सादा और पौष्टिक खाना खाएं.
  3. गर्म पानी का सेवन करें.
  4. भाप और गरारे करें.
  5. नींद पूरी लें.
  6. स्ट्रेस बिलकुल ना लें.

सबसे जरुरी खुश रहे क्यूंकि ” खुशिया सर्वश्रेष्ठ दवा है “.

स्रोत राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान [इंटरनेट]: यू.एस. स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग; न्यूमोनिया