चाँद के दूसरी बाजू में में आखिर है क्या ?

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हम सभी बचपन से आसमान में जगमगाते हुए चाँद को देखते हुए बड़े हुए है। इस दौरान हम में से अक्सर ने इस बात पर गौर किया होंगा के चाँद के दुसरे हिस्से को हम में से किसीने नहीं देखा । जब भी कभी चाँद हमारे आँखों के सामने आता है तो वही बाजु सामने की तरफ दिखाई देती है जो हमने पहले देखि है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता के चाँद कितना बड़ा या छोटा है या फिर आसमान में किस जगहपर है।

हमारे पूर्वजो में यह अवधारणा बनी हुई थी के हम चाँद की दूसरी बाजु कभी देख नहीं सकते मतलब वह डार्क (dark) यानी काली है। पिंक फ्लोयेड की कविता “डार्क साइड ऑफ़ द मून ” में हम इसे देख सकते है। प्राचीन समय में तो यह अवधारणा बहुत ही मजबूती के साथ बनी हुई थी ।

अपोलो मिशन के अन्तरिक्ष यात्रियों ने जब अपने यान के साथ चन्द्रमा का चक्कर लगाया तो उन्होंने चाँद की दूसरी बाजु को देखा था ।

ओर, हम चंद्रमा के उस हिस्से को क्या कहते हैं जिसे हम हर महीने नहीं देखते हैं? उपयोग करने के लिए बेहतर शब्द “दूर की ओर” है। यह एकदम सही समझ में आता है क्योंकि यह हमसे सबसे दूर है।

इसे आसनिके साथ समझने के लिए, चाँद के पृथ्वी के साथ संबंधों को और करीब से देखते है । चंद्रमा पृथ्वी के गिर्द इस तरह से परिक्रमा करता है कि एक चक्कर लगाने में लगभग उतनी ही लंबाई लगती है जितनी कि पृथ्वी की परिक्रमा करने में लगती है। अर्थात्, चंद्रमा हमारे ग्रह की कक्षा के दौरान एक बार अपनी धुरी पर घूमता है। वह एक तरफ हमारी कक्षा के दौरान हमारा सामना कर रहा है। इस स्पिन-ऑर्बिट लॉक का तकनीकी नाम “ज्वारीय लॉकिंग” (tidal-locking) है।

चाँद के दूसरी बाजू में में आखिर है क्या ?

बेशक, चंद्रमा की एक बाजू अँधेरी होती है। लेकिन यह हमेशा एक ही बाजु नहीं होती । अंधेरा
कहा है यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम चंद्रमा के किस चरण को देखते हैं। एक नए चंद्रमा के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच स्थित होता है। इसलिए, पृथ्वी पर हम जिस ओर से सामान्य रूप से देखते हैं, वह सामान्य रूप से सूर्य द्वारा प्रकाशित होता है। केवल जब चंद्रमा सूर्य से विपरीत दिशा में होता है तो क्या हम सतह के उस हिस्से को चमकते हुए देखते हैं। और इसमें विपरीत बाजू में वास्तव में अँधेरा होता है।

चंद्रमा का दूर का हिस्सा एक कभी रहस्यमय और छिपा हुआ था। लेकिन यह सब तब बदल गया जब 1959 में यूएसएसआर के लूना 3 मिशन द्वारा इसके गड्ढे की सतह की पहली छवियों को वापस पृथ्वी भेजा गया।

1960 के दशक के मध्य से कई देशों के वैज्ञानिको और अंतरिक्ष यान द्वारा चंद्रमा के इस हिस्से के बारेमे पता लगाया गया है, इस वजह से हम इसके बारे में आज हम बहुत कुछ जानते हैं। उदाहरण के लिए, चन्द्रमा के बहुत सारे गड्ढो के बारे में जैसे की एक गड्ढे को मारिया कहा जाता है, और माना जाता है के इन मे से कुछ गड्ढो के निचे बर्फ छुपी हुई है । इसके साथ चंद्रमपर पहाड़ साथ ही पहाड़ भी हैं।

चन्द्रमा की यह बाजु पृथ्वी की ओर से जानेवाली रेडियो फ्रिक्वेंसी के हस्तक्षेप से बहुत दूर है, इसलिए
यह रेडियो दूरबीन लगाने के लिए एक सही जगह है और खगोलविदों ने लंबे समय से वहां वेधशालाओं को रखने के विकल्प पर चर्चा की है। अन्य देश (चीन सहित) वहां स्थायी कॉलोनियों और ठिकानों का पता लगाने की बात कर रहे हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष पर्यटक चंद्रमा के निकट और दूर दोनों ओर खोज के लिए उत्सुक हो सकते हैं।

कौन जानता है? की एक दिन हम चंद्रमा के सभी किनारों पर रहना और काम करना सिख लेंगे , हो सकता है कि एक दिन हम चंद्रमा के सबसे दूर स्थित मानव उपनिवेश और बस्तिया बसायेंगे ।

स्रोत थॉट को

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