दिल्ली की सड़कों पर तेज़ रफ्तार अब सिर्फ़ एक आदत नहीं, बल्कि जानलेवा लत बन चुकी है। 3 फरवरी की रात द्वारका सेक्टर-11 के पास जो हुआ, वह इसी सच्चाई की सबसे क्रूर तस्वीर है। 23 साल के साहिल धनैशरा—घर के इकलौते कमाने वाले—अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी एक तेज़ रफ्तार SUV ने उन्हें टक्कर मार दी। साहिल की मौके पर ही मौत हो गई।
SUV चला रहा था 19 साल का अक्षत्र सिंह—बिना ड्राइविंग लाइसेंस। पुलिस ने उसे मौके पर गिरफ्तार किया, गाड़ियाँ ज़ब्त कीं और “लापरवाही से मौत” का केस दर्ज किया। उसी SUV की टक्कर से एक कैब ड्राइवर भी घायल हुआ, जिसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस Scorpio से यह हादसा हुआ, उस पर पहले से 13 ओवरस्पीडिंग चालान दर्ज थे—फिर भी वह सड़क पर दौड़ती रही।
“मेरा बेटा लौटकर नहीं आएगा, पर क्या कोई जवाबदेही होगी?”
Just 22, Sahil Dhaneshra was killed brutally by a scorpio UP57BM3057 driven by a 19 yo Boy who did not even have a License. This happened when he & his sister were making speed fun reels
— Deepika Narayan Bhardwaj (@DeepikaBhardwaj) February 16, 2026
His mother is pleading for Justice@DCPDwarka @DelhiPolicepic.twitter.com/Vvf3fr6h2t
साहिल की माँ इन्ना—एक सिंगल मदर—ने 14 फरवरी को एक भावुक वीडियो अपील साझा की। आँसुओं के बीच उनकी आवाज़ कांप रही थी, लेकिन सवाल साफ़ था: जब कानून सब देख रहा था, तो हादसा क्यों नहीं रुका? वीडियो देखते ही देखते हज़ारों लोगों तक पहुँचा। सोशल मीडिया पर लोग दिल्ली पुलिस को टैग कर सख़्त कार्रवाई की माँग करने लगे।
पत्रकार Shiv Aroor ने इस मुद्दे को लाइव चर्चा में उठाया, वहीं Deepika Narayan Bhardwaj ने तथ्य साझा करते हुए बताया कि आरोपी न सिर्फ़ नाबालिग/किशोर श्रेणी में आता है, बल्कि लाइसेंस के बिना “स्पीड रील्स” के लिए ड्राइव कर रहा था। आरोपी को जुवेनाइल बोर्ड के सामने पेश किया गया और 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए जमानत मिल गई—यहीं से बहस और तेज़ हो गई।
कानून, उम्र और जवाबदेही—कहीं कुछ टूटता है
यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की परतों में छुपी ढिलाइयों का आईना है। बार-बार चालान होने के बावजूद वाहन का सड़क पर रहना । बिना लाइसेंस ड्राइविंग पर समय रहते सख़्त रोक न लगना। नाबालिग/किशोर मामलों में पीड़ित परिवार की पीड़ा का पर्याप्त प्रतिफल न मिल पाना । इन सबके बीच, एक माँ का घर सूना हो गया।
सड़क सुरक्षा: पोस्टर नहीं, कठोर फैसले चाहिए
दिल्ली में रोड सेफ्टी पर नारे बहुत हैं, पर अमल कम। अगर 13 चालान के बाद भी वाहन चल सकता है, तो सवाल सिर्फ़ ड्राइवर का नहीं—निगरानी और प्रवर्तन का है। इन ठोस कदमों पर अब टालमटोल नहीं होनी चाहिए:
- रीपीट ऑफ़ेंडर्स के वाहनों का तत्काल सीज़ और लाइसेंस/आरसी निलंबन।
- स्पीड कैमरा डेटा का रियल-टाइम एक्शन—चालान नहीं, रोक।
- नाबालिग/बिना लाइसेंस ड्राइविंग पर अभिभावकों की जवाबदेही तय।
- पीड़ित परिवारों के लिए तेज़ न्याय और मुआवज़ा की समयबद्ध व्यवस्था।
साहिल वापस नहीं आएगा। लेकिन अगर इस केस से भी हम नहीं जागे, तो अगला नाम किसी और के घर का होगा। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सड़कें हमारी साझा ज़िम्मेदारी हैं—और न्याय, सिर्फ़ फ़ाइलों में नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए।
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित है और आगे अपडेट हो सकती है। तथ्यों की पुष्टि जारी है।





