लैक्टिक एसिड: यह कहाँ पाया जाता है?

तेज़ दौड़ के बाद जाँघों में हल्की जलन, ताज़ा दही की खटास, और पर्यावरण‑अनुकूल प्लास्टिक – ये तीनों एक अदृश्य कड़ी से जुड़े हैं: लैक्टिक एसिड

लैक्टिक एसिड क्या है, और शरीर इसे क्यों बनाता है?

लैक्टिक एसिड (2‑हाइड्रॉक्सीप्रोपेनोइक एसिड) एक रंगहीन, हल्का अम्लीय कार्बनिक अम्ल है जो हमारे शरीर, खाने और उद्योग – तीनों में अहम भूमिका निभाता है।

lactic acid
Lactic Acid Ka Sutr

जब आप तेज़ दौड़ते हैं, भारी वजन उठाते हैं या हाई‑इंटेंसिटी वर्कआउट करते हैं, तो मांसपेशियों को तुरंत ऊर्जा चाहिए होती है। उस समय शरीर “ऐनएरोबिक मेटाबॉलिज़्म” के ज़रिए ग्लूकोज़ को तोड़ता है और उसी प्रक्रिया में लैक्टिक एसिड (या ज्यादा सही कहें तो लैक्टेट) बनता है।

पुरानी मान्यता थी कि यही लैक्टिक एसिड मांसपेशियों की जलन और बाद में होने वाले दर्द का मुख्य कारण है, लेकिन नई रिसर्च कहती है कि लैक्टेट तो उल्टा एक फ़्यूल जैसा काम करता है – दिल, दिमाग और मसल्स इसे दोबारा ऊर्जा के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

शरीर में लैक्टिक एसिड की भूमिका: दुश्मन नहीं, हेल्पर

  • तुरंत ऊर्जा का स्रोत:
    तीव्र व्यायाम के दौरान लैक्टेट जल्दी उपलब्ध ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल हो सकता है और थकान को कुछ देर तक टालने में मदद करता है।
  • ग्लूकोज़ में दोबारा रूपांतरण:
    लैक्टेट लिवर में जाकर दोबारा ग्लूकोज़ में बदल सकता है, जिसे Cori cycle का हिस्सा माना जाता है।
  • सिग्नलिंग मॉलिक्यूल:
    यह सिर्फ “वेस्ट प्रोडक्ट” नहीं, बल्कि एक तरह का सिग्नल भी है जो शरीर को बताता है कि मसल्स पर कितना ज़ोर पड़ा, और समय के साथ उन्हें और मजबूत बनने के लिए प्रेरित करता है।

ज़रूरी बात: मांसपेशियों की जलन और बाद में आने वाला दर्द (DOMS) केवल लैक्टिक एसिड से नहीं, बल्कि कई दूसरे बायप्रोडक्ट्स और सूक्ष्म क्षति से मिलकर होता है।

लैक्टिक एसिड किन‑किन चीज़ों में पाया जाता है?

1. किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थ

कई फूड आइटम्स में लैक्टिक एसिड लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया द्वारा प्राकृतिक किण्वन से बनता है।

आप इसे खासकर इन चीज़ों में पाएँगे:

  • डेयरी
    • दही, केफिर, छाछ
    • दही पेय, कुछ चीज़ (Cheese), खट्टा क्रीम आदि
  • सब्ज़ियाँ
    • अचार/पिकल्स (खीरा, मिर्च आदि)
    • सौकरौट (खट्टा पत्ता गोभी), किमची, अन्य lacto‑fermented सब्ज़ियाँ
  • अनाज व बेकरी
    • सॉरडो ब्रेड (खमीर वाला खट्टा ब्रेड)
    • कुछ खट्टे आटे/डो से बने उत्पाद
  • पेय
    • कोम्बुचा, दही‑आधारित पेय
    • कुछ प्रकार की बीयर और वाइन, जहां किण्वन से लैक्टिक एसिड बन सकता है
  • प्रोसेस्ड फूड
    • कुछ cured meats (जैसे सलामी, हैम, सॉसेज)
    • कैंडी, कन्फेक्शनरी, सॉस (सोया सॉस, वॉर्सेस्टरशायर सॉस) आदि, जहाँ परिरक्षक या फ्लेवर एजेंट के रूप में Lactic Acid या उसके सॉल्ट जोड़े जाते हैं।

2. जहाँ यह “ऐड” किया जाता है

बहुत‑से पैक्ड फूड में लैक्टिक एसिड सीधे ingredient के रूप में भी डाला जाता है –

  • प्रिज़र्वेटिव (खराब होने से बचाने के लिए)
  • फ्लेवर एन्हांसर (हल्की खटास और टंग लाने के लिए)
  • Acidity regulator (pH बैलेंस के लिए)

इसलिए, कोई चीज़ किण्वित न भी हो, तब भी आप उसकी ingredient list में “Lactic Acid” या इसके सॉल्ट (जैसे sodium lactate, calcium lactate) लिखे देख सकते हैं।

फूड इंडस्ट्री में लैक्टिक एसिड: खटास से आगे की कहानी

  • स्वाद और टेक्सचर:
    ब्रेड, केक, बिस्किट, कन्फेक्शनरी में हल्की खटास, मुलायम क्रम्ब और बेहतर टेक्सचर के लिए लैक्टिक एसिड या लैक्टिक फर्मेंटेशन का इस्तेमाल होता है।
  • शेल्फ लाइफ बढ़ाना:
    इसकी हल्की एंटीमाइक्रोबियल प्रकृति कई बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकती है, इसलिए pickles, processed meats और रेडी‑टू‑ईट प्रोडक्ट्स में यह प्रिज़र्वेटिव की तरह काम करता है।
  • “क्लीन‑लेबल” ऑप्शन:
    कई कंपनियाँ सिंथेटिक प्रिज़र्वेटिव के बजाय फर्मेंटेशन से बने लैक्टिक एसिड को चुनती हैं, क्योंकि उपभोक्ता इसे ज़्यादा “नेचुरल” मानते हैं।

इंडस्ट्री में लैक्टिक एसिड: प्लास्टिक से स्किन‑केयर तक

खाना ही नहीं, लैक्टिक एसिड आज की “ग्रीन” और “सस्टेनेबल” टेक्नोलॉजी का भी अहम हिस्सा बन चुका है।

  • बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (PLA):
    लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) नाम का बायोप्लास्टिक बनता है, जिसका उपयोग पैकेजिंग, डिस्पोज़ेबल कप‑प्लेट, टेक्सटाइल और दूसरे सिंगल‑यूज़ आइटम्स में हो रहा है।
  • कॉस्मेटिक और स्किन‑केयर:
    क्रीम, सीरम और फेस‑वॉश में AHA (Alpha Hydroxy Acid) के रूप में लैक्टिक एसिड का उपयोग एक्सफोलिएशन, स्किन टोन सुधारने और pH बैलेंस के लिए किया जाता है।
  • फ़ार्मा और मेडिकल:
    कुछ दवाओं, IV सॉल्यूशन, वाउंड‑केयर प्रोडक्ट और ड्रग‑डिलीवरी सिस्टम में लैक्टिक एसिड और उसके डेरिवेटिव उपयोग होते हैं।

क्या लैक्टिक एसिड से डरना चाहिए?

आम तौर पर, खाने‑पीने की चीज़ों में मिलने वाली मात्रा काफ़ी सुरक्षित मानी जाती है, खासकर जब वह प्राकृतिक किण्वन से बनी हो।

लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना समझदारी है:

  • लैक्टोज़/डेयरी से एलर्जी या इंटॉलरेंस हो तो डेयरी‑आधारित फर्मेंटेड प्रोडक्ट चुनने से पहले डॉक्टर/डाइटीशियन की सलाह लें।
  • बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड, ज़्यादा नमक‑या‑ज़्यादा फैट वाले फर्मेंटेड मांस/कन्फेक्शनरी नियमित रूप से ज्यादा खाना वैसे भी हेल्दी नहीं माना जाता – वहाँ “लैक्टिक एसिड” नहीं, पूरा पैटर्न मायने रखता है।

अगली बार जब वर्कआउट के बाद थोड़ी जलन महसूस हो, या दही‑किमची‑अचार की प्लेट आपके सामने हो, तो याद रखिए – कहीं न कहीं लैक्टिक एसिड भी पर्दे के पीछे अपना रोल निभा रहा है।

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लेखक हिंदी भाषा विषयों मे रचनात्मक सामग्री के निर्माता और प्रकाशक हैं। लेखक अपने ज्ञान द्वारा वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करना पसंद करते है। लेखक को Facebook और Twitter पर फॉलो करे ।
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