औषधीय वनस्पति गिलोय के फायदे और जानकारी

गिलोय एक बहुतसे फायदे देनेवाली वाली आयुर्वेदिक झाड़ी एव बेल वनस्पति है। इसका अंग्रेजी वैज्ञानिकी नाम टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया (Tinospora Cordifolia) है । गिलोय का मराठी नाम गुळवेल तथा गुडूची है। यह अन्य पेड़ों पर उगती है। इस वनस्पति का संबंध मेनिस्पर्मेसी (Menispermaceae) परिवार से है। यह पौधा भारत का मूल निवासी है, लेकिन चीन और ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी पाया जाता है। इसका पत्ता , लकड़ी और रस बहुत गुणकारी होता है । आयुर्वेद मे इसे रस, चूर्ण और घनवटी के द्वारा सेवन करने की विधि बताई गई है ।

गिलोय को अन्य नामों से भी जाना जाता है इसमे में गुडूची और अमृता भी शामिल है। शब्द “गिलोय” एक हिंदू पौराणिक शब्द है। इस का नाम एक काल्पनिक स्वर्गीय अमृत से मेल खाता है जिसका उल्लेख पुराणों मे है । उन पौराणिक उल्लेख के मुताबिक वह एक ऐसा अमृत है जो स्वर्ग मे रहने वाले जीवों को हमेशा के लिए युवा रखता है। संस्कृत में, “गुडुची” का अर्थ कुछ ऐसा है जो पूरे शरीर की रक्षा करता है, और “अमृत” का अर्थ है अमरता।

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गिलोय (Giloy) क्या है ?

गिलोय (Giloy) एक आयुर्वेदिक चिकित्सा मे शामिल महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है । गिलोय एक बेल वनस्पति है जो किसी चीज के सहारे ऊपर की और चढ़ती है। कई जानकार लोग इसे बुखार, संक्रमण और मधुमेह जैसे कई बिमारिओ के स्थिति में इलाज की तौर पर इस्तेमाल करते है। इसे आयुर्वेदिक और आम चिकित्सा में एक आवश्यक हर्बल (Herbal) पौधा माना जाता है, जहां लोग इसका उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य स्थितियों के इलाज के लिए करते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में गिलोय पौधे के सभी भागों का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इसके डंडी और तने को सबसे फायदेमंद घटक माना जाता है। भारत के आयुर्वेदिक फार्माकोपिया (Pharmacopoeia) ने दवा में गिलोय के तने के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

गिलोय की पहचान (Giloy Ki Pehchan) कैसे करे ?

गिलोय के औषधीय गुणी का फायदा उठाने के लिए उसकी पहचान करना जरूरी होता है । गिलोय के बेल की पहचान करना ज्यादा मुश्किल नहीं है । यह एक बेल वनस्पति होती है जो अन्य पेड़ोंपर या उनके सहारे उगती है । खास तौर पर यह आम और नीम के पुराने वृक्ष के आस पास देखने मिलती है । इसके पत्ते पान के पत्तों की तरह हृदय आकार के दिखाई देते है । इसमे छह पंखुड़िया होती है और इसके फल गुच्हा कार गोल और लाल रंग के होते है । यह एक सदाबहार हरित लता वनस्पति है ।

जिस वृक्ष को यह आधार बनाकर ऊपर चढ़ती है उसके वनस्पति गुण भी इसके अंदर या जाते है , इसलिए नीम के पेड़ पर उगी हुई गिलोय को ज्यादा औषधीय माना जाता है । इससी के जैसी एक नकली बेल होती है जिसे तोड़नेपर दूध जैसा रस निकलता है लेकिन असली गिलोय मे ऐसा नहीं होता । इस तरह आप असली नकली की पहचान कर सकते है ।

गिलोय का पौधा (Giloy Ka Paudha) कैसा होता है ?

गिलोय का पौधा कलम या बीज द्वारा लगाया जाता है । जहा पर नीम और आम जैसे पेड़ पहलेसे लगे हुए है वहा पर गिलोय के पौधे को लगाया जा सकता है । फिर यह बेल उस पेड़ का आधार लेकर ऊपर चढ़ती है । बीज द्वारा भी इसे लगाया जा सकता है । इसके लिए आपको इसके बीज पहले कुछ घंटे भिगोकर रखना होंगे और फिर 3 इंच मिट्टी मे इसे लगा दे । पौधा निकल आनेपार उसे सह वृक्ष पर चढ़ा दे । फिर यह कुछ वक्त के बाद अपनी जड़े उस सह वृक्ष मे जमा लेगा और तेजी से बढ़ने लगेगा ।

गिलोय का फूल (Giloy Ka Phool) कैसा होता है ?

गिलोय के फूल छोटे-छोटे पीले रंग के गुच्छों में आते हैं। यह अक्सर ग्रीष्म ऋतु में दिखाई देते है । फूल कम से कम 2 मिमी आकार के होते हैं। इसके फल पकने पर खून जैसे लाल रंग के हो जाते हैं। फल के अंदर बीज सफेद, चिकने, कुछ टेढ़े मिर्च के दानों के जैसे होते हैं।

गिलोय का स्वाद (Giloy Ka Swad) कैसा होता है ?

गिलोय के पत्तों का स्वाद कड़वा और तीखा होता है । इसमे कुछ विशेष गंध नहीं आती । किसी और चीज के साथ मिलाकर आप इसका स्वाद बदल सकते है , जैसे की शहद इत्यादि ।

गिलोय के फायदे क्या है ? | Giloy Ke Fayde Kya Hai ?

गिलोय की लकड़ी के फायदे | Giloy Ke Lakdi Ke Fayde

गिलोय के लकड़ी के अंदर औषधीय गुणधर्म होते है । आप उसे वैसे ही या फिर उसकी पाउडर बनाकर इस्तेमाल कर सकते है । गिलोय के लकड़ी का सेवन करने से आखों की रौशनी मे सुधार आता है । डायबेटिस कंट्रोल मे रहता है । खास करके गिलोय बुखार और संक्रमण मे बहुत फायदेमंद है । इसकी लकड़ी गरम पानी मे डालकर या काढ़ा बनाकर इसका सेवन करना चाहिए ।

गिलोय जूस के फायदे | Giloy Ke Juice Ke Fayde


गिलोय का जूस श्वास नलिका संबंधित परेशानियों मे फायदेमंद है । यह अस्थमा और खासी मे राहत दिलाता है । इसे आवल और नीम के रस के साथ सेवन करने से त्वचा संबधित बीमारी , पीलिया और कुष्ट रोग मे फायदेमंद है । इसके साथ ही यह सूजन काम करता है और गठिया, आर्थेराइटिस से बचाव करता है ।

🤔 गिलोय का जूस कैसे बनाते हैं ?

गिलोय के लकड़ी अथवा डंडीयो को कूटकर , ग्राइन्ड कर आप जूस बना सकते है। इसके साथ आप आवला या नींबू का रस मिल सकते है । इसे सुबह खाली पेट पीने से अच्छा फायदा होता है ।

गिलोय के पत्ते के फायदे | Giloy Ke Patto Ke Fayde

कान मे दर्द , पीलिया और एनीमिया जैसे परेशानियों मे गिलोय के पत्तों का सेवन करने से आराम मिलता है । इसका रोजाना सेवन करने से गैस और कब्ज मे भी राहत मिलती है । पाचन तंत्र मे सुधार आता है और आपका मूड भी अच्छा राहत है ।

गिलोय घनवटी के फायदे | Giloy Ghanvati Ke Fayde

गिलोय घनवटी के गुण कई बीमारी एव रोगों मे फायदेमंद है । गिलोय और उस से बने दवाओ और टैबलेट जैसे की गिलोय घनवटी का इस्तेमाल निम्न बीमारी एव परिस्थितिओ मे किया जाता है।

  • बुखार
  • पेशाब संबंधी समस्याएं
  • दमा
  • पेचिश (आंतों का संक्रमण)
  • दस्त (डायरिया )
  • त्वचा में संक्रमण
  • हैनसेन रोग (जिसे पहले कुष्ठ रोग कहा जाता था)
  • मधुमेह (डायबेटिस)
  • गाउट (संधिवात)
  • पीलिया
  • एनोरेक्सिया (भूख संबंधित समस्या)
  • आँख संबंधित समस्या

गिलोय घनवटी को सुबह खाली पेट खाना चाहिए।

गिलोय मे मौजूद गुणकारी घटक

गिलोय के पाए जाने वाले घटकों की वजह से इसमे हमे संभावित स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते है । शोधकर्ताओं ने गिलोय में घटकों के चार प्रमुख वर्गों की पहचान की है, जैसे की

टेरपेनोइड्स : गिलोय के पौधे मे सबसे अधिक पाया जाने वाला घटक है । इन्ही घटक की वजह से पौधे को सुगंध , स्वाद और विशेष रंग प्राप्त होता है । लैब मे किए परिसक्षणों से पता चलता है के इनमे रोगाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटीकैंसर और एंटीडायबिटिक गुण हैं ।

एल्कलॉइड : अल्कलॉइड की वजह से कुछ पौधों कड़वा स्वाद देते हैं। कई दवाओ मे इसे चिकितस्तकों द्वारा सुझाया जाता है । सही मात्रा में एल्कलॉइड शक्तिशाली रसायन होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन काल से लोगों ने पौधों मे मौजूद अल्कलॉइड का उपयोग बीमारियों के उपचार के रूप में और जहर के रूप में किया है। गिलोय मे मौजूद एल्कलॉइड के कुछ चिकित्सीय फायदे कई बड़ी बीमारियों मे भी दिखाई देते है , जैसे की

  • रक्त चाप
  • दर्द से राहत
  • कैंसर
  • मलेरिया
  • आंतों में ऐंठन

लिग्नांस : यह पौधे को रोग और कीटों से दूर रखता है । लिग्नान ऐसे यौगिक हैं जो ज्यादातर रेशेदार पौधों में पाए जाते हैं। वे वायरस, कवक और अन्य रोगाणुओं के विकास को रोकने के लिए जाने जाते हैं। लिग्नांस विशेष रूप से दिलचस्प हैं क्योंकि शोध में पाया गया है कि वे प्रयोगशाला परीक्षणों में कुछ प्रकार के कैंसर कोशिकाओं के विकास को धीमा कर सकते हैं या मार भी सकते हैं।

स्टेरॉयड :यह इंफलेमेशन कम करने वाले दवाओ मे इस्तेमाल होता है । पौधों में स्टेरॉयड घटक के कुछ संभावित फायदे निम्न स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों हो सकते हैं

  • त्वचा स्वास्थ्य
  • घाव भरने
  • हृदय स्वास्थ्य
  • यह आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

कई वैज्ञानिक शोध और प्रयोगों मे यह प्रमाणित होता है की गिलोय के अंदर मौजूद घटक की बीमारिओ के इलाज मे फायदेमंद है । इनमे मुख्य तौरपर सूजन, मधुमेह, रोगाणु जनित बीमारिया शामिल है ।

स्रोत हेल्थलाइन
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