दुनिया दो महाद्वीप को जोड़ने वाला शहर- इस्तांबुल

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इस्तांबुल अद्वितीय सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि का शहर है। यह उतना ही आकर्षक और ऐतिहासिक है जितना कि यह गतिशील और आधुनिक है. इस्तांबुल शहर ने तक़रीबन सोलह शताब्दियों तक पूर्वी रोमन या बीजान्टिन और ओटोमन जैसे लगातार दो शक्तिशाली साम्राज्यों की राजधानी के रूप में सेवा दी. यह शहर दो यूरोप और आशिया महाद्वीपों के बीच वर्गाकार रूप से स्थित है. इसी लिए इसे दो महाद्वीप में बंटा शहर के खासियत से पहचाना जाता है. इस्तांबुल की संस्कृतियां और परंपराएं पूर्व और पश्चिमी भूमध्य सागर के साथ अनातियन के संस्कृति के साथ मिश्रण करती हैं. प्रत्येक सभ्यता जिसने इस्तांबुल को अपना घर बना लिया है उसने उदात्त और शानदार तरीके से अपनी छाप छोड़ी है, और यह एक ऐसा शहर जो हर इतिहास में सार्वभौमिक इतिहास की भावना देता है.

1923 में गणतंत्र व्यवश्ता अपनाने के बाद से, इस्तांबुल का विकास जारी रहा और आज यह शहर में रहने वाले 15.5 मिलियन से अधिक लोगों केसाथ बढ़ चूका है. यह बात इस्तांबुल को तुर्की का सबसे बड़ा शहर और दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक बनाता है.

इस्तांबुल के सबसे पहले निवासि दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व से वहा निवास कर रहे है. उस ज़माने में वह लोग शहर के एशियाई छोर पर बस गए थे. इस शहर का पहला नाम मेगारा राजा बीजस से आया है. 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में फारसियों ने शहर पर शासन किया और अलेक्जेंडर महान से 4 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के बाद इसे ले लिया, जो कि दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक शांतिपूर्ण काल ​​था। १९३ ईस्वी में रोमन सम्राट सेप्टिमस सेवरस ने शहर पर विजय प्राप्त की और यह 4 वीं शताब्दी ईस्वी तक रोमन शासन के अधीन रहा.

सम्राट कॉन्स्टैंटिन द ग्रेट ने बैजान्टियम  को पूरे रोमन साम्राज्य की राजधानी बनाया और इसे अपना नाम दिया: कॉन्स्टेंटिनोपल , यह शहर रोम की तरह सात पहाड़ियों पर बनाया गया था.
प्रारंभिक बैजान्टिन सम्राटों ने अपने इस शहर को प्राचीन दुनिया के खजाने से भर दिया, खासतौर से चौथी और छठी शताब्दी के बीच आबादी आधे मिलियन से अधिक हो गई थी .

जस्टिनियन प्रथम के शासनकाल के दौरान 532 में, दंगों ने शहर को लगबघ नष्ट कर दिया था . लेकिन फिर यह पुनर्निर्मित किया गया . 

सुल्तान मुहम्मद  द्वितीय के नेतृत्व में तुर्क ने 1453 में कॉन्स्टेंटिनोपल पर शानदार विजय प्राप्त की. फिर यह इस्लांबोल नामित शहर अबकी बार तुर्क साम्राज्य की राजधानी बन गया. 15 वीं और 16 वीं शताब्दी के बीच, सुल्तानों ने इस शहर में कई मस्जिदों और सार्वजनिक इमारतों का निर्माण किया, जिस वजह से 1500 के मध्य तक जनसंख्या को फिर से आधा मिलियन तक पहुच गयी थी. कई जमानेतक इस्तांबुल एक प्रमुख सांस्कृतिक, राजनीतिक और वाणिज्यिक केंद्र था. “इस्तांबुल” नाम सदियों से “इस्लामंबोल” (“इस्लाम का शहर” ) और “ईस टिन पोलिन” (ग्रीक में “शहर में”) के संयोजन से लिया गया था.

दुनिया दो महाद्वीप को जोड़ने वाला शहर- इस्तांबुल

सुल्तान महमूद द्वितीय के इस शहर को जितने के बाद स्थापित हुआ तुर्क शासन द्वितीय विश्व युद्ध तक चलता रहा. महायुद्ध के आखरी वक्त में इस्तांबुल शहर पर सहयोगी सैनिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया था. कब्जे वाले बलों के खिलाफ अतातुर्क के नेतृत्व में वर्षों के संघर्ष के बाद, तुर्की गणराज्य का जन्म १९२३ में हुआ था और अंकारा  शहर राजधानी बन गया ,  लेकिन इस्तांबुल ने नाटकीय रूप से विस्तार करना जारी रखा है; आज इसकी आबादी 15 मिलियन से अधिक है और अभी भी लगातार बढ़ रही है.