दुनिया का सबसे खतरनाक जहर – पोलोनियम

Polonium Jahar

पोलोनियम दुनिया का सबसे खतरनाक जहर है । यह एक रेडिओधर्मी मेटेलॉइड है जो कोई भी जीव के लिए बेहत ही खतरनाक जहर है । इसके थोड़े से कण भी किसी इंसान को बेहत बीमार कर मार देने के लिए काफी है । इसका जहर तुरंत काम नहीं करता लेकिन जो भी नुकसान करता है उसे भरा नहीं जा सकता । यह सीधे डीएनए और प्रतिकार क्षमता पर वार करता है । इंसान के शरीर मे दाखिल होनेपर यह इंसान को धीरे धीरे मार देता है ।

सन १८९७ में मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी ने पोलोनियम की खोज की। मैरी क्यूरी ने पोलोनियम (Polonium) का नाम अपनी मातृभूमि पोलैंड (Poland) नाम से प्रेरित होकर रखा। तब पोलैंड विभक्त राष्ट्र नहीं था । पोलैंड के अलग अलग इलाकों पर को रशियन और जर्मन का राज था । इसका नाम पोलैंड के नाम पर से रखने का एक मकसद यह था की लोगों मे पोलैंड के भावी आजादी की चर्चा हो । उस वक्त तक खोजे गए पदार्थों मे यह सबसे खतरनाक था ।

सबसे खतरनाक जहर पोलोनियम के बारे मे मुख्य बिन्दु ,

  • यह एक दुर्लभ और अत्यधिक रेडियोधर्मी तत्व है।
  • पोलोनियम का कोई स्थिर आइसोटोप नहीं होता है।
  • पोलोनियम की खोज 1897 मे हुई ।
  • इसका उपयोग राजनैतिक हत्याओ मे किया गया है ।
  • सिगरेट मे बेहत अल्प प्रमाण मे पोलोनियम मौजूद होता है ।

दुनिया का सबसे खतरनाक जहर| duniya ka sabse khatarnak jahar

पोलोनियम दुनिया मे मौजूद सबसे खतरनाक जहर है । यह एक रेडियोधर्मी तत्व है जो पर्यावरण में स्वाभाविक रूप से बहुत कम स्तर पर पाया जाता है। इसे परमाणु रिएक्टर में उत्पादित किया जा सकता है। माना जाता है कि इस खतरनाक जहरीले तत्व का की वजह से नवंबर २००६ में पूर्व रूसी खुफिया एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की मौत हो गई थी। शक किया जाता है की धोखा देने की वजह से रुसियों ने उन्हे यह खतरनाक जहर दे दिया था ।

पूर्व फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के नेता यासर अराफात का २००४ में निधन हो गया था, लेकिन २०१२ में उनकी मौत की हत्या की जांच शुरू कर दी गई। उनके शरीर को कब्र से निकाला गया और जांचा की गयी।  इसीदौरान उनके टूथब्रश, कपड़ों और किफ़िएह पर duniya ka sabse khatarnak jahar (पोलोनियम -२१०) के उच्च स्तर पाए गए, जो उन्होंने पहना था ।

sabse khatarnak jahar
सबसे खतरनाक जहर
पोलोनियम का स्त्रोत

पोलोनियम -२१० के अनु अल्फा कणों का उत्सर्जन करते है। यह अल्फा उत्सर्जन कोशिकाओं के अंदरआनुवंशिक सामग्री को नुकसान पहुंचाते है और उन्हे नष्ट भी करते है । इसके आइसोटोप विषैले तथा जहरीले होते हैं और वह अल्फा कण उत्सर्जित करते है। अगर पॉलोनियम साँस द्वारा शरीर में प्रवेश करता है तो वह बहुत ही नुकसान पहुंचाता है क्योंकि अल्फा कण फेफड़ों के अंदर बहुत प्रतिक्रियाशील होते हैं।

पोलोनियम त्वचा के माध्यम से अवशोषित नहीं होता और न ही इसके अल्फा विकिरण शरीरमे गहराई से प्रवेश करते है। पोलोनियम को आमतौर पर तब ही जहरीला माना जाता है जब की वह किसी माध्यम से शरीर के अंदर दाखिल हो जाए । जैसे की श्वास, खाने, एक खुले घाव के माध्यम से। इसके नुक्सान पहुंचने में भी कुछ सीमा होती है यह  त्वचा, कागज या कपड़ों को पार नहीं कर सकता सकता। इसके शरीर में दाखिल होना ही सबसे खतरनाक चींज है।

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, सावधानीपूर्वक हाथ धोना और नहाना इसके ज्यादातर निशान को खत्म कर सकता है। निकोटीन एंड टोबैको रिसर्च जर्नल में २०११  में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि तंबाकू कंपनियों को पता है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू युक्त उत्पादों में पोलोनियम कम स्तर पर मौजूद होता है। अध्ययन के लेखकों ने गणना की कि सिगरेट में पोलोनियम से रेडियोधर्मिता २५ साल की अवधि में हर 1,000 धूम्रपान करने वालों के मे 138 मौतों के लिए जिम्मेदार है।

अन्य शोधों से पता चला है कि यू.एस. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के विष विज्ञान डाटा नेटवर्क के अनुसार पोलोनियम धूम्रपान करने वालों की पसलियों में दुगनी मात्रा में गैर-धूम्रपान करने वालों के मुकाबले में पाया जाता है। इस लिए धूम्रपान करना यानि इस सबसे खतरनाक जहर (duniya ka sabse khatarnak jahar) से रोज खेलने जैसा है ।